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Chapter Five : Karm Sanyaas Yog | Shreemad Bhagwad Geeta Sanjay Ki Nazar Se

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This chapter compares the path of karm sanyās (renunciation of actions) with the path of karm yog (work in devotion). Shree Krishna explains that both lead to the same goal, and we can choose either of them..... Read more

Chapter Four : Gyana Karm Sanyas Yog | Shreemad Bhagwad Geeta Sanjay Ki Nazar Se

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In Chapter four, Shree Krishna strengthens Arjun’s faith in the knowledge he is imparting to him by revealing its pristine origin.Lord Krishna explains  how this is an eternal science that he taught in the beginning to... Read more

छठा अध्यायः आत्मसंयम योग – श्रीमद्भगवद्गीता (संजय की नजर से)

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इस अध्याय में कार्यक्रम के एंकर डाॅ. संजय बियानी द्वारा बताया गया है कि यह अध्याय उन लोगों के लिए बहुत उपयोगी है जिनकी उम्र 15 से 25 के बीच है। जिनका मन पढ़ाई में नहीं लगता और यह उनके प्रत्येक कार्य को प्रभावित करता है, इस अध्याय में अर्जुन और कृष्ण का संवाद आपके जीवन में बदलाव लाने वाला है। Read more

पाँचवाँ अध्यायः कर्मसंन्यासयोग – श्रीमद्भगवद्गीता (संजय की नजर से)

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इस एपिसोड जिसका नाम है ‘‘कर्मसंन्यासयोग‘‘ में कार्यक्रम के सूत्रधार डाॅ. संजय बियानी द्वारा बताया गया है कि हमारी ज्यादातर बीमारियाँ मानसिक है, जिसके लिए जरूरी है कि हम अपने मन और शरीर को जाने और जैसे हर बीमारी की कोई ना कोई दवा जरूर होती है वैसे ही हमारी समस्त मानसिक बीमारियों की भी दवा है, और वो है ‘‘श्रीमद्भगवद्गीता‘‘। Read more

चौथा अध्यायः श्रीमद्भगवद्गीता | ज्ञानकर्मसन्यास योग

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रीमद्भगवद्गीता (संजय की नजर से) चौथा अध्यायः ज्ञानकर्मसन्यास योग सांख्य योग में ज्ञान की बात हुई तो कर्म योग में शरीर की बात हुई, शरीर से कर्म कैसे किया जाए और बुद्धि से ज्ञान मार्ग पर कैसे चला जाए इसे जाना, लेकिन अब ईश्वर को जानना जरुरी है। क्योंकि अर्जुन का सवाल था कि मैं ईश्वर को क्यों मानू। इस अध्याय में ईश्वर का परिचय, ईश्वर के आने का कारण, स्वभाव, सहित आठ बातों पर चर्चा की गई है। आइए एक बार फिर इस यात्रा पर चले और जाने चौथे अध्याय- ज्ञानकर्मसन्यास योग को। Read More

तीसरा अध्याय – श्रीमदभगवदगीता | कर्म योग

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रीमदभगवदगीता (संजय की नजर से) तीसरा अध्याय- कर्म योग श्रीमद्भगवद्गीता का तीसरे अध्याय हमें अपने जीवन की कई समस्याओं का हल जानने में मदद करता है। किसी काम को करने में हम सफल क्यों नहीं होते। हमें उसे करने का तरीका मालूम नहीं होता। ये ऐसे प्रश्न है जो हमारे सामने आते हैं। ऐसे ही प्रश्न आज से लगभग 5000 साल पूर्व अर्जुन को परेशान करते थे, जिसका उत्तर उन्हें श्रीकृष्ण से मिला। अर्जुन श्रीकृष्ण से कहते है कि मेरा कर्म क्या है मुझे युद्ध क्यों करना चाहिए। Read more...  

Adhyay 3- Shreemad Bhagwad Geeta | Karma Yog

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Karma Yog  In this chapter of Bhagwad Gita , Shree Krishna explains that all the mortal beings are obliged to work by their inherent modes of nature ,this implies that the beings are intrinsically guided as to how they shall behave and act in their bodily abode, Lord Krishna further states that nobody can remain without action for even an instant.  Read more....